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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 30: पारिजात-हरण
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श्लोक 29
श्लोक
5.30.29
शची च सत्यभामायै पारिजातस्य पुष्पकम्।
न ददौ मानुषीं मत्वा स्वयं पुष्पैरलङ्कृता॥ २९॥
अनुवाद
परंतु कल्पवृक्ष के पुष्पों से विभूषित इन्द्राणी ने सत्यभामा को मनुष्य समझकर वे पुष्प उसे नहीं दिए॥29॥
But Indrani, adorned with the flowers of Kalpavriksha, did not give those flowers to Satyabhama considering her to be a human being. 29॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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