श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 30: पारिजात-हरण  »  श्लोक 24-25
 
 
श्लोक  5.30.24-25 
श्रीपराशर उवाच
अदित्यैवं स्तुतो विष्णु: प्रहस्याह सुरारणिम्*।
माता देवि त्वमस्माकं प्रसीद वरदा भव॥ २४॥
अदितिरुवाच
एवमस्तु तथेच्छा ते त्वमशेषैस्सुरासुरै:।
अजेय: पुरुषव्याघ्र मर्त्यलोके भविष्यसि॥ २५॥
 
 
अनुवाद
अदिति बोलीं - हे सिंह! तुम्हारी मनोकामना पूर्ण हो। तुम मृत्युलोक के सभी अच्छे-बुरे भूतों से अजेय होगे। 25॥
 
Aditi said – Oh male lion! May your wish be fulfilled. You will be invincible by all the good and evil spirits in the mortal world. 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)