श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 30: पारिजात-हरण  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.30.16 
यै: स्वधर्मपरैर्नाथ नरैराराधितो भवान्।
ते तरन्त्यखिलामेतां मायामात्मविमुक्तये॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे नाथ! जो मनुष्य स्वधर्म के अनुसार भक्तिपूर्वक आपका भजन करते हैं, वे इस सम्पूर्ण मोह से पार होकर मोक्ष प्राप्त करते हैं॥16॥
 
O Nath! Those men who worship you with devotion to their own religion, cross over all this illusion for their salvation. ॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)