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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 29: नरकासुरका वध
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श्लोक 33
श्लोक
5.29.33
ता: कन्यास्तांस्तथा नागांस्तानश्वान्द्वारकां पुरीम्।
प्रापयामास गोविन्दस्सद्यो नरककिङ्करै:॥ ३३॥
अनुवाद
श्रीकृष्णचन्द्र ने तुरन्त ही उन कन्याओं, हाथियों और घोड़ों को नरकासुर के सेवकों द्वारा द्वारकापुरी भिजवा दिया।
Sri Krishnachandra immediately had those girls, elephants and horses sent to Dwarkapuri through the servants of Narakasura. 33.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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