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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 28: रुक्मीका वध
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श्लोक 21
श्लोक
5.28.21
श्रीपराशर उवाच
अथान्तरिक्षे वागुच्चै: प्राह गम्भीरनादिनी।
बलदेवस्य तं कोपं वर्द्धयन्ती महात्मन:॥ २१॥
अनुवाद
श्री पराशर जी बोले - उसी समय महात्मा बलदेव जी के क्रोध को बढ़ाते हुए आकाशवाणी हुई, गम्भीर स्वर में -॥21॥
Shri Parashar Ji said – At the same time, increasing the anger of Mahatma Baldev Ji, a voice from the sky said in a serious tone -॥ 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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