श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 25: बलभद्रजीका व्रज-विहार तथा यमुनाकर्षण  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.25.10 
गृहीत्वा तां हलान्तेन चकर्ष मदविह्वल:।
पापे नायासि नायासि गम्यतामिच्छयान्यत:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
और मद से विह्वल होकर उन्होंने यमुना को नाक से पकड़कर खींचा और कहा, "अरे पापिनी! तू नहीं आई! अच्छा, अब [यदि तुझमें शक्ति हो] तो अपनी इच्छानुसार कहीं और जा सकती है॥10॥
 
And being overwhelmed with intoxication, he caught Yamuna by her nose and pulled her and said, "Oh sinner! You did not come! Well now [if you have the strength] you may go anywhere else as per your wish.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)