श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 24: मुचुकुन्दका तपस्याके लिये प्रस्थान और बलरामजीकी व्रजयात्रा  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.24.3 
भुक्त्वा दिव्यान्महाभोगान्भविष्यसि महाकुले।
जातिस्मरो मत्प्रसादात्ततो मोक्षमवाप्स्यसि॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वहाँ परम दिव्य सुखों को भोगकर अन्त में तुम महान कुल में जन्म लोगे, उस समय तुम्हें अपना पूर्वजन्म स्मरण होगा और तब मेरी कृपा से तुम मोक्ष को प्राप्त करोगे॥3॥
 
After enjoying the most divine pleasures there you will finally be born in a great family, at that time you will remember your previous birth and then by my grace you will attain salvation. ॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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