श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 24: मुचुकुन्दका तपस्याके लिये प्रस्थान और बलरामजीकी व्रजयात्रा  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  5.24.21 
गोपैश्च पूर्ववद्राम: परिहासमनोहरा:।
कथाश्चकार रेमे च सह तैर्व्रजभूमिषु॥ २१॥
 
 
अनुवाद
और पहले की भाँति वे ग्वालों के साथ विनोद करते हुए बहुत-सी सुन्दर बातें कहते और व्रजभूमि में उनके साथ नाना प्रकार की लीलाएँ करते रहे॥21॥
 
And as before, while joking with the cowherds, He spoke many beautiful things and continued performing various pastimes with them in Vrajabhoomi. ॥21॥
 
इति श्रीविष्णुपुराणे पञ्चमेंऽशे चतुर्विंशोऽध्याय:॥ २४॥
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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