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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 24: मुचुकुन्दका तपस्याके लिये प्रस्थान और बलरामजीकी व्रजयात्रा
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श्लोक 20
श्लोक
5.24.20
सन्देशैस्साममधुरै: प्रेमगर्भैरगर्वितै:।
रामेणाश्वासिता गोप्य: कृष्णस्यातिमनोहरै:॥ २०॥
अनुवाद
तब बलभद्रजी ने गोपियों को श्रीकृष्णचन्द्र का एक अत्यन्त सुन्दर, शान्त, प्रेमयुक्त एवं अभिमानरहित सन्देश सुनाकर सान्त्वना दी॥20॥
Then Balabhadraji consoled the Gopis by telling them a very beautiful and peaceful, love-filled and prideless message from Krishnachandra. 20॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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