श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 24: मुचुकुन्दका तपस्याके लिये प्रस्थान और बलरामजीकी व्रजयात्रा  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  5.24.14 
कच्चित्स्मरति न: कृष्णो गीतानुगमनं कलम्।
अप्यसौ मातरं द्रष्टुं सकृदप्यागमिष्यति॥ १४॥
 
 
अनुवाद
क्या कृष्णचन्द्र को हमारे गीता-अनुयायी की मधुर वाणी कभी याद आती है? क्या वे एक बार अपनी माता के दर्शन करने यहाँ आएंगे?॥14॥
 
Does Krishnachandra ever remember the beautiful voice of our Geeta follower? Will he come here once to see his mother?॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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