श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 23: द्वारका-दुर्गकी रचना, कालयवनका भस्म होना तथा मुचुकुन्दकृत भगवत्स्तुति  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.23.11 
तस्माद्दुर्गं करिष्यामि यदूनामरिदुर्जयम्।
स्त्रियोऽपि यत्र युद्धेयु: किं पुनर्वृष्णिपुङ्गवा:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
इसलिए मैं यादवों के लिए एक ऐसा अजेय किला बनवा रहा हूँ, जिसमें श्रेष्ठ वृष्णि ही नहीं, स्त्रियाँ भी युद्ध कर सकेंगी।
 
Therefore, I am getting such an invincible fort constructed for the Yadavas that not only the best of Vrishnis but even the women can fight from there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)