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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 22: जरासन्धकी पराजय
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श्लोक 18
श्लोक
5.22.18
मनुष्यदेहिनां चेष्टामित्येवमनुवर्तते।
लीला जगत्पतेस्तस्यच्छन्दत: परिवर्तते॥ १८॥
अनुवाद
इस प्रकार मनुष्यरूपधारी मनुष्यों के कर्मों का अनुसरण करते हुए जगत् के स्वामी भगवान् की दिव्य लीलाएँ उनकी इच्छानुसार होती रहीं ॥18॥
In this manner, following the actions of those in human form, the divine plays of the Lord of the world kept taking place according to His will. ॥18॥
इति श्रीविष्णुपुराणे पञ्चमेंऽशे द्वाविंशोऽध्याय:॥ २२॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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