श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 22: जरासन्धकी पराजय  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.22.17 
साम चोपप्रदानं च तथा भेदं च दर्शयन्।
करोति दण्डपातं च क्वचिदेव पलायनम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
कहीं वह शांति का, कहीं दान का, कहीं भेद का प्रयोग करता था, कहीं दण्ड का प्रयोग करता था और कहीं स्वयं भाग जाता था॥17॥
 
At some places he used to use pacification, at some places charity and at some places he used to use discrimination, at some places he used to punish and at some places he used to run away himself.॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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