| श्री विष्णु पुराण » अंश 5: पंचम अंश » अध्याय 22: जरासन्धकी पराजय » श्लोक 14 |
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| | | | श्लोक 5.22.14  | मनुष्यधर्मशीलस्य लीला सा जगतीपते:।
अस्त्राण्यनेकरूपाणि यदरातिषु मुञ्चति॥ १४॥ | | | | | | अनुवाद | | यह तो मानव-मूल्यों परायण जगत के स्वामी की लीला है कि वे अपने शत्रुओं पर नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्र छोड़ रहे हैं ॥14॥ | | | | It is the play of the Lord of the universe, who is devoted to human values, that he is releasing various types of weapons on his enemies. ॥ 14॥ | | ✨ ai-generated | | |
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