श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 20: कुब्जापर कृपा, धनुर्भंग, कुवलयापीड और चाणूरादि मल्लोंका नाश तथा कंस-वध  »  श्लोक 93
 
 
श्लोक  5.20.93 
उत्थाप्य वसुदेवस्तं देवकी च जनार्दनम्।
स्मृतजन्मोक्तवचनौ तावेव प्रणतौ स्थितौ॥ ९३॥
 
 
अनुवाद
तब वसुदेव और देवकी को पूर्वजन्म में कहे गए भगवान के वचन स्मरण हो आए और वे श्री जनार्दन को पृथ्वी से उठाकर आदरपूर्वक उनके समक्ष खड़े हो गए ॥93॥
 
Then Vasudeva and Devaki remembered the words of the Lord spoken in their previous lives and they picked up Sri Janardana from the earth and stood before him with respect. ॥93॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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