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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 20: कुब्जापर कृपा, धनुर्भंग, कुवलयापीड और चाणूरादि मल्लोंका नाश तथा कंस-वध
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श्लोक 85
श्लोक
5.20.85
एवमाज्ञापयन्तं तु प्रहस्य मधुसूदन:।
उत्प्लुत्यारुह्य तं मञ्चं कंसं जग्राह वेगत:॥ ८५॥
अनुवाद
जब कंस यह आदेश दे रहा था, तब श्रीमधुसूदन हँसते हुए मंच पर कूद पड़े और तुरन्त उसे पकड़ लिया ॥ 85॥
While Kamsa was giving these orders, Sri Madhusudana leapt upon the stage laughing and quickly caught hold of him. ॥ 85॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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