श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 20: कुब्जापर कृपा, धनुर्भंग, कुवलयापीड और चाणूरादि मल्लोंका नाश तथा कंस-वध  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  5.20.72 
मृदङ्गादिषु तूर्येषु प्रतिषिद्धेषु तत्क्षणात्।
खे सङ्गतान्यवाद्यन्त देवतूर्याण्यनेकश:॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
रंगशाला में मृदंग और तुरीय आदि के बंद हो जाने पर आकाश में एक साथ अनेक दिव्य तुरही बजने लगीं ॥72॥
 
After the Mridangam and Turiya etc. stopped in the theatre, many divine trumpets started playing simultaneously in the sky. 72॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)