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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 20: कुब्जापर कृपा, धनुर्भंग, कुवलयापीड और चाणूरादि मल्लोंका नाश तथा कंस-वध
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श्लोक 102
श्लोक
5.20.102
यस्मिन्प्रतिष्ठितं सर्वं जगत्स्थावरजङ्गमम्।
स कोष्ठोत्सङ्गशयनो मानुषो जायते कथम्॥ १०२॥
अनुवाद
जिन प्रभु में सम्पूर्ण चराचर जगत स्थित है, वे गर्भ और गोद में शयन करने वाले मनुष्य कैसे हो सकते हैं ॥102॥
How can that Lord in whom the entire movable and immovable universe is situated, be a human being who sleeps in the womb and lap? ॥102॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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