श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 19: भगवान् का मथुरा-प्रवेश, रजक-वध तथा मालीपर कृपा  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  5.19.28 
नोपसर्गादिकं दोषं युष्मत्सन्ततिसम्भव:।
अवाप्स्यति महाभाग यावत्सूर्यो भविष्यति॥ २८॥
 
 
अनुवाद
हे महात्मन! जब तक सूर्य विद्यमान है, तब तक आपके वंश में उत्पन्न कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रकार के कष्ट (अचानक बीमारी) या अन्य दोषों से ग्रस्त नहीं होगा।
 
O great one! As long as the Sun exists, no one born in your lineage will suffer from any trouble (sudden illness) or other defects.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)