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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 19: भगवान् का मथुरा-प्रवेश, रजक-वध तथा मालीपर कृपा
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श्लोक 26
श्लोक
5.19.26
भुक्त्वा च विपुलान्भोगांस्त्वमन्ते मत्प्रसादत:।
ममानुस्मरणं प्राप्य दिव्यं लोकमवाप्स्यसि॥ २६॥
अनुवाद
तू भी यावज्जिवन में नाना प्रकार के सुखों को भोगकर अन्त में मेरी कृपा से मेरा स्मरण करके दिव्य लोक को प्राप्त होगा॥26॥
You too, after enjoying various types of pleasures in Yavajjivan, in the end, by my grace, by remembering me, you will reach the divine world. 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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