श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 19: भगवान् का मथुरा-प्रवेश, रजक-वध तथा मालीपर कृपा  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.19.2 
परित्यक्तान्यविषयो मनस्तत्र निवेश्य स:।
ब्रह्मभूते चिरं स्थित्वा विरराम समाधित:॥ २॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने अन्य सब विषयों से मन हटाकर उसी में मन लगाया और बहुत समय तक उस ब्रह्म में लीन रहे और फिर ध्यान से विमुख हो गए॥2॥
 
He withdrew his mind from all other subjects and concentrated on that only and remained absorbed in that Brahman for a long time and then became averse to meditation.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)