श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 19: भगवान् का मथुरा-प्रवेश, रजक-वध तथा मालीपर कृपा  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.19.18 
विकासिनेत्रयुगलो मालाकारोऽतिविस्मित:।
एतौ कस्य सुतौ यातौ मैत्रेयाचिन्तयत्तदा॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे मैत्रेय! उन्हें देखकर माली के नेत्र आनन्द से चमक उठे और वह आश्चर्यचकित होकर सोचने लगा - 'ये किसके पुत्र हैं और कहाँ से आये हैं?'॥18॥
 
O Maitreya! On seeing them the gardener's eyes lit up with joy and he was astonished and wondered, 'Whose sons are these and where have they come from?'॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)