श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 19: भगवान् का मथुरा-प्रवेश, रजक-वध तथा मालीपर कृपा  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.19.13 
स्त्रीभिर्नरैश्च सानन्दं लोचनैरभिवीक्षितौ।
जग्मतुर्लीलया वीरौ मत्तौ बालगजाविव॥ १३॥
 
 
अनुवाद
वहाँ उपस्थित स्त्री-पुरुषों द्वारा प्रसन्नतापूर्वक देखे जाने पर वे दोनों वीर, मदमस्त युवा हाथियों की भाँति क्रीड़ा करते हुए आगे बढ़े।
 
Being joyfully watched by the men and women there, both of them went along playfully like brave, intoxicated young elephants.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)