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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 18: भगवान् का मथुराको प्रस्थान, गोपियोंकी विरह-कथा और अक्रूरजीका मोह
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श्लोक 9
श्लोक
5.18.9
अहं रामश्च मथुरां श्वो यास्यावस्सह त्वया।
गोपवृद्धाश्च यास्यन्ति ह्यादायोपायनं बहु॥ ९॥
अनुवाद
कल मैं और भाई बलराम दोनों तुम्हारे साथ मथुरा चलेंगे। अन्य वृद्ध गोप भी बहुत-सी भेंटें लेकर हमारे साथ चलेंगे॥9॥
Brother Balarama and I will both go with you to Mathura tomorrow. Other elderly gopas will also go with us, taking many gifts with them.॥ 9॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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