श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 18: भगवान् का मथुराको प्रस्थान, गोपियोंकी विरह-कथा और अक्रूरजीका मोह  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.18.8 
करिष्ये तन्महाभाग यदत्रौपयिकं मतम्।
विचिन्त्यं नान्यथैतत्ते विद्धि कंसं हतं मया॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे महामुनि! इस विषय में मैं जो उचित समझूँगा, वही करूँगा। अब आप कंस को मेरे हाथों मरा हुआ ही समझिए, अन्य किसी प्रकार से उसके विषय में विचार न कीजिए।॥8॥
 
O great one! I will do whatever I deem fit in this matter. Now you should consider Kansa as dead at my hands, do not think about it in any other way. ॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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