श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 18: भगवान् का मथुराको प्रस्थान, गोपियोंकी विरह-कथा और अक्रूरजीका मोह  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.18.7 
तत्सर्वं विस्तराच्छ्रुत्वा भगवान‍्देवकीसुत:।
उवाचाखिलमप्येतज्ज्ञातं दानपते मया॥ ७॥
 
 
अनुवाद
सारी कथा विस्तारपूर्वक सुनने के बाद भगवान देवकीनन्दन बोले, "हे दाता! ये सब बातें मुझे ज्ञात हो गई हैं।
 
After listening to the entire story in detail, Lord Devakinandan said, "O donor! I have come to know all these things.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)