श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 18: भगवान् का मथुराको प्रस्थान, गोपियोंकी विरह-कथा और अक्रूरजीका मोह  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  5.18.54 
न कल्पनामृतेऽर्थस्य सर्वस्याधिगमो यत:।
तत: कृष्णाच्युतानन्तविष्णुसंज्ञाभिरीडॺते॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
क्योंकि कल्पना के बिना किसी भी वस्तु का ज्ञान नहीं होता, इसीलिए कृष्ण, अच्युत, अनन्त और विष्णु आदि नामों से आपकी स्तुति होती है [वास्तव में आपको किसी नाम से पुकारा नहीं जा सकता] ॥54॥
 
Because without imagination there is no knowledge of any object, that is why you are praised by the names Krishna, Achyuta, Ananta and Vishnu etc. [in fact you cannot be referred to by any name]. ॥ 54॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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