श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 18: भगवान् का मथुराको प्रस्थान, गोपियोंकी विरह-कथा और अक्रूरजीका मोह  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  5.18.50 
भूतात्मा चेन्द्रियात्मा च प्रधानात्मा तथा भवान्।
आत्मा च परमात्मा च त्वमेक: पञ्चधा स्थित:॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
आप ही जड़रूप, इन्द्रियरूप और मूलरूप हैं। आप ही जीवात्मा और परमात्मा हैं। इस प्रकार आप ही पाँच रूपों में विद्यमान हैं ॥50॥
 
You are the material form, the sense form and the primary form. You are the living soul and the Supreme Soul. In this way, you alone exist in five forms. ॥ 50॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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