श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 18: भगवान् का मथुराको प्रस्थान, गोपियोंकी विरह-कथा और अक्रूरजीका मोह  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  5.18.35 
श्रीपराशर उवाच
तथेत्युक्तस्ततस्स्नातस्स्वाचान्तस्स महामति:।
दध्यौ ब्रह्म परं विप्र प्रविष्टो यमुनाजले॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशर बोले, ‘हे ब्राह्मण!’ तब भगवान के ‘बहुत अच्छा’ कहने पर बुद्धिमान अक्रूरजी यमुना जल में प्रवेश कर गए, स्नान किया, कुल्ला किया और फिर परमात्मा का ध्यान करने लगे।
 
Sri Parashara said, 'Oh Brahmin!' Then, on the Lord's saying 'very good', the wise Akrur entered the Yamuna water, took a bath, rinsed his mouth and then started meditating on the Supreme Being.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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