श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 18: भगवान् का मथुराको प्रस्थान, गोपियोंकी विरह-कथा और अक्रूरजीका मोह  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  5.18.34 
अथाहकृष्णमक्रूरो भवद्‍भ्यां तावदास्यताम्।
यावत्करोमि कालिन्द्यां आह्निकार्हणमम्भसि॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
वहाँ पहुँचकर अक्रूर ने श्रीकृष्णचन्द्र से कहा, "आप दोनों तब तक यहीं रुकें जब तक मैं यमुना के जल में अपनी मध्याह्न पूजा समाप्त न कर लूँ।"
 
Upon reaching there, Akrura said to Sri Krishnachandra, “You both please stay here till I finish my midday worship in the waters of the Yamuna.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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