श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 18: भगवान् का मथुराको प्रस्थान, गोपियोंकी विरह-कथा और अक्रूरजीका मोह  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  5.18.32 
श्रीपराशर उवाच
इत्येवमतिहार्द्देन गोपीजननिरीक्षित:।
तत्याज व्रजभूभागं सह रामेण केशव:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशरजी बोले - इस प्रकार गोपियों के प्रति अत्यन्त स्नेह रखते हुए श्री कृष्णचन्द्र बलरामजी के साथ व्रजभूमि से चले गए ॥32॥
 
Shri Parasharji said - In this way, with great affection for the Gopis, Shri Krishnachandra left Vrajbhoomi along with Balramji. 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)