श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 18: भगवान् का मथुराको प्रस्थान, गोपियोंकी विरह-कथा और अक्रूरजीका मोह  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  5.18.30 
अक्रूर: क्रूरहृदयश्शीघ्रं प्रेरयते हयान्।
एवमार्त्तासु योषित्सु कृपा कस्य न जायते॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
हम जैसी असहाय स्त्रियों पर किसे दया न आएगी? परन्तु देखो, यह क्रूरहृदय अक्रूरजी घोड़ों को बड़ी तेजी से हाँक रहे हैं!॥30॥
 
Who would not have pity on helpless women like us? But look, this cruel-hearted Akrur is driving the horses very fast! ॥ 30॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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