श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 18: भगवान् का मथुराको प्रस्थान, गोपियोंकी विरह-कथा और अक्रूरजीका मोह  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.18.3 
कृतसंवन्दनौ तेन यथावद‍्बलकेशवौ।
तत: प्रविष्टौ संहृष्टौ तमादायात्ममन्दिरम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात जब अक्रूरजी ने उन्हें विधिपूर्वक प्रणाम किया, तब श्री बलरामजी और कृष्णचन्द्र अत्यन्त प्रसन्न होकर उनके साथ उनके घर आये॥3॥
 
Thereafter, after Akrurji had done his proper obeisance, Shri Balramji and Krishnachandra became very happy and came to their home with him. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)