श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 18: भगवान् का मथुराको प्रस्थान, गोपियोंकी विरह-कथा और अक्रूरजीका मोह  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  5.18.24 
सुप्रभाताद्य रजनी मथुरावासियोषिताम्।
पास्यन्त्यच्युतवक्त्राब्जं यासां नेत्रालिपङ्‍क्तय:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
आज की रात मथुरा की स्त्रियों के लिए एक सुन्दर सुबह बन गई है, क्योंकि आज उनकी स्त्रियाँ श्री अच्युत के मुख से अमृत का पान करेंगी।
 
Tonight has turned into a beautiful morning for the women of Mathura, because today their eye-bees will drink the nectar from the mouth of Sri Achyuta.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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