श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 18: भगवान् का मथुराको प्रस्थान, गोपियोंकी विरह-कथा और अक्रूरजीका मोह  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  5.18.23 
नन्दगोपमुखा गोपा गन्तुमेते समुद्यता:।
नोद्यमं कुरुते कश्चिद‍्गोविन्दविनिवर्तने॥ २३॥
 
 
अनुवाद
देखो, ये नन्दगोप और अन्य ग्वाले भी उनके साथ जाने की तैयारी कर रहे हैं। इनमें से कोई भी गोविन्द को वापस लाने का कोई प्रयास नहीं कर रहा है।
 
Look, these Nandagopa and other cowherds are also preparing to go with him. None of them is making any effort to bring Govind back. 23.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)