श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 18: भगवान् का मथुराको प्रस्थान, गोपियोंकी विरह-कथा और अक्रूरजीका मोह  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  5.18.14 
मथुरां प्राप्य गोविन्द: कथं गोकुलमेष्यति।
नगरस्त्रीकलालापमधु श्रोत्रेण पास्यति॥ १४॥
 
 
अनुवाद
"अब श्रीकृष्णचन्द्र मथुरापुरी में जाकर गोकुल क्यों लौट आए? क्योंकि वहाँ तो वे नगर की स्त्रियों के मधुर राग को ही अपने कानों से पीएँगे॥ 14॥
 
"Now why did Sri Krishnachandra return to Gokul after going to Mathurapuri? Because there he will only drink the sweet melody of the women of the city with his ears.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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