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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 17: अक्रूरजीकी गोकुलयात्रा
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श्लोक 10
श्लोक
5.17.10
मत्स्यकूर्मवराहाश्वसिंहरूपादिभि: स्थितिम्।
चकार जगतो योऽज: सोऽद्य मां प्रलपिष्यति॥ १०॥
अनुवाद
जिन्होंने अजन्मे मत्स्य, कच्छप, वराह, हयग्रीव और नरसिंह आदि रूप धारण करके संसार की रक्षा की है, वे आज मुझसे बात करेंगे।
Those who have protected the world by taking the forms of the unborn fish, tortoise, boar, Hayagriva and Narasimha etc. will be talking to me today.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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