श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 16: केशि-वध  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.16.3 
तस्य हेषितशब्देन गोपाला दैत्यवाजिन:।
गोप्यश्च भयसंविग्ना गोविन्दं शरणं ययु:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
उस घोड़े जैसे राक्षस की हिनहिनाहट से भयभीत होकर सभी गोप-गोपियाँ श्रीगोविन्द की शरण में आए॥3॥
 
Frightened by the neighing sound of that horse-like demon, all the Gopas and Gopis came to seek refuge in Shri Govind. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)