श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 14: वृषभासुर-वध  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.14.13 
उत्पाटॺ शृङ्गमेकं तु तेनैवाताडयत्तत:।
ममार स महादैत्यो मुखाच्छोणितमुद्वमन्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उसने अपना एक सींग उखाड़कर उस पर प्रहार किया, जिससे वह महादैत्य मुख से रक्त वमन करता हुआ मर गया ॥13॥
 
Thereafter he plucked out one of his horns and attacked him with the same, due to which that great demon died vomiting blood from his mouth. ॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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