श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 13: गोपोंद्वारा भगवान् का प्रभाववर्णन तथा भगवान् का गोपियोंके साथ रासक्रीडा करना  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  5.13.59 
ता वार्यमाणा: पतिभि: पितृभिभ्रार्तृभिस्तथा।
कृष्णं गोपाङ्गना रात्रौ रमयन्ति रतिप्रिया:॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
वे रसिक गोपांगनाएँ अपने पति, माता-पिता और भाई आदि के रोकने पर भी रात्रि में श्री श्यामसुन्दर के साथ विहार करती थीं ॥59॥
 
Those Rasik Gopanganas used to roam around with Shri Shyamsundar at night despite being stopped by their husbands, parents and brothers etc. 59॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)