स तथा सह गोपीभी ररास मधुसूदन:।
यथाब्दकोटिप्रतिम: क्षणस्तेन विनाभवत्॥ ५८॥
अनुवाद
श्री मधुसूदन भी गोपियों के साथ इस प्रकार रास लीला कर रहे थे कि उनके बिना एक क्षण भी गोपियों को लाखों वर्षों के समान प्रतीत होता था ॥ 58॥
Sri Madhusudan was also playing Raas Leela with the Gopis in such a way that even a single moment without him seemed like millions of years to the Gopis. ॥ 58॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥