श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 13: गोपोंद्वारा भगवान् का प्रभाववर्णन तथा भगवान् का गोपियोंके साथ रासक्रीडा करना  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  5.13.56 
रासगेयं जगौ कृष्णो यावत्तारतरध्वनि:।
साधु कृष्णेति कृष्णेति तावत्ता द्विगुणं जगु:॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
गोपियाँ भी कृष्णचन्द्र द्वारा रासो-सम्बन्धी गीतों के गायन से दुगुनी ऊँची आवाज में "धन्य कृष्ण! धन्य कृष्ण!" का कीर्तन कर रही थीं।
 
The Gopis were also chanting "Blessed Krishna! Blessed Krishna!" twice as loudly as Krishnachandra was singing the Raso-related songs. 56.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)