श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 13: गोपोंद्वारा भगवान् का प्रभाववर्णन तथा भगवान् का गोपियोंके साथ रासक्रीडा करना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  5.13.52 
कृष्णश्शरच्चन्द्रमसं कौमुदीं कुमुदाकरम्।
जगौ गोपीजनस्त्वेकं कृष्णनाम पुन: पुन:॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
उस समय श्रीकृष्णचन्द्र चन्द्रमा, चन्द्रमा की ज्योति और कमलवन से सम्बन्धित गीत गाने लगे; किन्तु गोपियाँ बार-बार केवल कृष्ण का ही नाम गाती रहीं।
 
At that time Krishnachandra started singing songs related to the moon, the moon's light and the lotus forest; but the Gopis kept on singing only the name of Krishna again and again. 52.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)