श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 13: गोपोंद्वारा भगवान् का प्रभाववर्णन तथा भगवान् का गोपियोंके साथ रासक्रीडा करना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  5.13.51 
तत: प्रववृते रासश्चलद्वलयनिस्वन:।
अनुयातशरत्काव्यगेयगीतिरनुक्रमात्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात रास लीला प्रारम्भ हुई। गोपियों की चंचल पायलें झनझनाने लगीं और फिर धीरे-धीरे शरद ऋतु से संबंधित गीत गाये जाने लगे। 51.
 
Thereafter the Raas Leela began. The playful anklets of the Gopis started tinkling and then gradually songs related to autumn started being sung. 51.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)