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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 13: गोपोंद्वारा भगवान् का प्रभाववर्णन तथा भगवान् का गोपियोंके साथ रासक्रीडा करना
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श्लोक 48
श्लोक
5.13.48
ताभि: प्रसन्नचित्ताभिर्गोपीभिस्सह सादरम्।
ररास रासगोष्ठीभिरुदारचरितो हरि:॥ ४८॥
अनुवाद
तब उदार स्वभाव वाले श्रीहरि ने उन प्रसन्न गोपियों के साथ रासमण्डल बनाया और आदरपूर्वक विहार किया॥48॥
Then the generous natured Shri Hari formed a Rasamandal with those happy gopis and had fun respectfully. 48॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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