vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 5: पंचम अंश
»
अध्याय 13: गोपोंद्वारा भगवान् का प्रभाववर्णन तथा भगवान् का गोपियोंके साथ रासक्रीडा करना
»
श्लोक 46
श्लोक
5.13.46
काचिदालोक्य गोविन्दं निमीलितविलोचना।
तस्यैव रूपं ध्यायन्ती योगारूढेव सा बभौ॥ ४६॥
अनुवाद
कोई गोपी गोविन्द को देखकर, नेत्र बंद करके उनके स्वरूप का ध्यान करती हुई, मानो योग में स्थित हो गई हो।
Some Gopi, seeing Govinda, closing her eyes and meditating on his form, began to appear as if in Yoga. 46.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×