श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 13: गोपोंद्वारा भगवान् का प्रभाववर्णन तथा भगवान् का गोपियोंके साथ रासक्रीडा करना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  5.13.45 
काचिद‍्भ्रूभङ्गुरं कृत्वा ललाटफलकं हरिम्।
विलोक्य नेत्रभृङ्गाभ्यां पपौ तन्मुखपंकजम्॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
कुछ लोग प्रेमवश अपनी भौंहों को सिकोड़कर श्रीहरि की ओर देखते हुए अपनी भौंहों के समान नेत्रों से उनके मुखकमल से अमृत पीने लगे।
 
Some, [out of love] wrinkled their foreheads with their eyebrows and looking at Sri Hari, began to drink the nectar from his lotus face with their eyes-like bees.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)