श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 13: गोपोंद्वारा भगवान् का प्रभाववर्णन तथा भगवान् का गोपियोंके साथ रासक्रीडा करना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  5.13.44 
काचिदालोक्य गोविन्दमायान्तमतिहर्षिता।
कृष्ण कृष्णेति कृष्णेति प्राह नान्यदुदीरयत्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
उस समय एक गोपी श्री गोविंद को आते देख बहुत प्रसन्न हुई और केवल "कृष्ण! कृष्ण!! कृष्ण!!!" कहती रही और कुछ न कह सकी।
 
At that time a Gopi, on seeing Sri Govinda coming, became very happy and kept on saying only, "Krishna! Krishna!! Krishna!!!" and could not say anything else.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)