vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 5: पंचम अंश
»
अध्याय 13: गोपोंद्वारा भगवान् का प्रभाववर्णन तथा भगवान् का गोपियोंके साथ रासक्रीडा करना
»
श्लोक 42
श्लोक
5.13.42
निवृत्तास्तास्तदा गोप्यो निराशा: कृष्णदर्शने।
यमुनातीरमासाद्य जगुस्तच्चरितं तथा॥ ४२॥
अनुवाद
तदनन्तर वे गोपियाँ कृष्ण को देखकर निराश होकर लौट गईं और यमुना के तट पर आकर उनके गान गाने लगीं॥42॥
Thereafter, those Gopis returned disappointed after seeing Krishna and came to the banks of Yamuna and started singing his songs. 42॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×