श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 13: गोपोंद्वारा भगवान् का प्रभाववर्णन तथा भगवान् का गोपियोंके साथ रासक्रीडा करना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  5.13.41 
प्रविष्टो गहनं कृष्ण: पदमत्र न लक्ष्यते।
निवर्तध्वं शशाङ्कस्य नैतद्दीधितिगोचरे॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
यहाँ से कृष्णचन्द्र गहन वन में चले गए हैं, इसलिए उनके चरणचिह्न दिखाई नहीं दे रहे हैं; अब तुम सब लौट जाओ; चन्द्रमा की किरणें यहाँ तक नहीं पहुँच सकतीं ॥41॥
 
From here Krishnachandra has gone into the deep forest, therefore his footprints are not visible; now all of you return; the rays of the moon cannot reach this place. ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)